आमद-ए-सैलाब-ए-तूफ़ान-ए-सदा-ए-आब है
नक़्श-ए-पा जो कान में रखता है उँगली जादा से
बज़्म-ए-मय वहशत-कदा है किस की चश्म-ए-मस्त का
शीशे में नब्ज़-ए-परी पिन्हाँ है मौज-ए-बादा से
देखता हूँ वहशत-ए-शौक़-ए-ख़रोश-आमादा से
फ़ाल-ए-रुस्वाई सरिश्क-ए-सर-ब-सहरा-दादा से
दाम गर सब्ज़े में पिन्हाँ कीजिए ताऊस हो
जोश-ए-नैरंग-ए- अर्ज़-ए-सहरा-दादा से
ख़ेमा-ए-लैला सियाह ओ ख़ाना-ए-मजनूँ ख़राब
जोश-ए-वीरानी है -ए-दाग़-ए-बैरूं-दादा से
बज़्म-ए-हस्ती वो तमाशा है कि जिस को हम 'असद'
देखते हैं चश्म-ए-अज़-ख़्वाब-ए-अदम-नकुशादा से
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है